Friday, August 21, 2026

 



जमाना 

इन बस्तियों  में  रहकर 

हमने  जमाना  देख लिया 

जहाँ  उठा  धुआं

आँखों में एक कतरा आंसू देख  लिया

फ़र्क़  पड़ता  नहीं  किसी को

किसी  के गम  से, 

इंसान  को  इंसान  से मुँह  मोड़ते  देख लिया 

क्या करे  उस  चिंगारी  का  जो  दिल  में  रोशन है ,

हमने  मोम को पत्थर  होते  देख लिया 

क्या  गुंजाईश अभी  बाकी  है?

अंधेरों में  रौशनी  की किरण अभी बाकी है  

क्योंकि   

यहाँ मैंने पत्थर को भी  ईश्वर  होते  देख लिया 

© Dr. Rashmi Jain

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