जमाना
इन बस्तियों में रहकर
हमने जमाना देख लिया
जहाँ उठा धुआं
आँखों में एक कतरा आंसू देख लिया
फ़र्क़ पड़ता नहीं किसी को
किसी के गम से,
इंसान को इंसान से मुँह मोड़ते देख लिया
क्या करे उस चिंगारी का जो दिल में रोशन है ,
हमने मोम को पत्थर होते देख लिया
क्या गुंजाईश अभी बाकी है?
अंधेरों में रौशनी की किरण अभी बाकी है
क्योंकि
यहाँ मैंने पत्थर को भी ईश्वर होते देख लिया